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100 Days Into the War: A Major Setback for Trump?


युद्ध के 100 दिन बाद ट्रम्प को झटका!

क्या आप जानते हैं कि आज से ठीक 100 दिन पहले ईरान के साथ जंग शुरू हुई थी। मगर 100 दिन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं और उनके पास इसका क्या सॉल्यूशन है? लगातार स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोंस में तनाव बनाए रखना। क्योंकि सेंट कॉम ने


एक वीडियो जारी किया है जिसमें वो दावा कर रहे हैं कि उन्होंने दो ईरानियन ड्रोंस को मार गिराया है जो कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस के ट्रैफिक को थ्रेटन कर रहे थे। दोस्तों जैसे कि आप देख सकते हैं इस वक्त मेरे पीछे इंडियन ओसियन है, भारतीय महासागर है और आप जानते हैं कि फारस की खाड़ी के एक

हिस्से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस में तनाव बना हुआ है। आपके स्क्रीन्स पर ये बड़ी खबर सीएनएन की यूएस फोर्सेस शूट डाउन टू इरेनियन ड्रोंस थ्रेटनिंग स्ट्रेट ऑफ होमस ट्रैफिक सेंट कॉम सेज और बाकायदा अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस संदर्भ में एक वीडियो भी जारी किया है जिसकी मैं चर्चा करूंगा।


मगर ट्रंप के लिए और भी बुरी खबरें आ रही है दोस्तों। जैसे कि आप अलजजीरा की इस खबर को देख सकते हैं। 100 डेज इनू द वॉर ऑन ईरान ट्रंप फेल्स टू रैली यूएस सपोर्ट। जहां ईरानी जनता अपनी सरकार के साथ पूरी तरह से खड़ी हुई है। वहीं अगर ट्रंप की बात करें तो ये जो 100 दिन की जंग है उनक

लिए लगातार मुश्किल होती जा रही है। उनके लिए अनपॉपुलर होती जा रही है और ये ट्रंप के लिए अच्छी खबर नहीं है। सबसे पहले मैं आपको अमेरिकी सेंट्रल कमांड का वो वीडियो दिखाना चाहता हूं जिसमें उन्होंने दो ईरानियन ड्रोंस को मार गिराया। आइए देखते हैं वो वीडियो क्योंकि इससे


माहौल और ज्यादा तनावग्रस्त हो गया है। देखा जाए। अब मैं आपको आसान लफ्जों में बताना चाहता हूं पूरी खबर क्या है क्योंकि इससे तनाव नए सिरे से बढ़ सकता है और तनाव इसलिए भी बढ़ सकता है दोस्तों क्योंकि आप जानते हैं कि ईरान हमेशा जवाब देता है और करारा जवाब जवाब देता है। खबर आपके स्क्रीन्स पर।


अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ और ड्रोन मार गिराए हैं। अमेरिका का कहना है कि यह ड्रोन दुनिया के अहम समुद्री रास्ते हॉर्मूस स्टेट में जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा आज पहले मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी बलों ने


ईरान के एक दो एकतरफा हमले करने वाले ड्रोन मार गिराए हैं जो हॉर्मूस स्टेट में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा बने हुए थे| अमेरिकी सेना ने कहा है कि वो ईरानी आक्रामकता के खिलाफ रक्षा जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। इन ड्रोन को मार गिराए जाने की घटना ऐसे समय


हुई है जब शुक्रवार को भी अमेरिका ने ईरान के चार अनअटैक्ड ड्रोन गिराने का दावा किया है। और आप जानते हैं दोस्तों कि ईरान लगातार अपनी तरफ से जवाब दे रहा है। अब हमें देखना पड़ेगा कि अगले 24 घंटों में ईरान इसका किस तरह से जवाब देता है क्योंकि आप जानते हैं कि ईरान इसका पलटवार


जरूर करता है और आईआरजीसी ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने कहा है कि तुम हिमाकत भी मत करना। ईरान पर दोबारा हमले या हमारे इंटरेस्ट को टारगेट करने की। मगर अमेरिका वहां नहीं रुक रहा है। आपकी स्क्रीन्स पर इस बड़ी खबर को देखिए दोस्तों। यूएस प्लान्स टू अलाउ ईरानियन एसेट्स टू बी यूज्ड फॉर


रिबिल्डिंग इन गल्फ स्टेट सोर्सेस से। दोस्तों, यह अपने आप में बहुत ही भड़काऊ खबर है। और मैं आपको बताता हूं कैसे। यह खबर भड़काऊ इसलिए है कि अमेरिका ने दुनिया भर में जहांजहां ईरानियन एसेट्स को फ्रीज करके रखा हुआ है, रोक कर रखा हुआ है, अब उन एसेट्स के सहारे गल्फ में जो नुकसान


हुआ है, उसकी भरपाई की जाएगी। सबसे पहली बात यह ईरान का पैसा है। यह अमेरिका का पैसा नहीं है। यह फैसला अमेरिका नहीं कर सकता कि इस पैसे को कहां लगाया जाएगा। नंबर दो, ईरान के अंदर जो नुकसान हुआ है, उसका क्या? जाहिर सी बात है कि अमेरिका इससे भाग नहीं सकता। जो नुकसान हुआ है


आपको उसकी भी भरपाई करनी पड़ेगी। जो ईरान के अंदर नुकसान हुआ है। स्वाभाविक सी बात है अमेरिका इससे भागने की कोशिश कर रहा है और उससे नए सिरे से तनाव बनेगा। अब आप एक तरह से देख सकते हैं कि एक तरफ आप हमला कर रहे हैं स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस पर वहां तनाव बढ़ा रहे हैं और दूसरी तरफ जैसा कि आप देख


रहे हैं उनकी संपत्तियों को जो है गल्फ में लगाया जाएगा और सीएनएन की जो ताजा खबर आ रही है ना जिसमें कहा जा रहा है कि यूएस प्लान्स टू अलाउ ईरानियन एसेट्स टू बी यूज्ड फॉर रिबिल्डिंग इन गल्फ स्टेट यह अपने आप में कहीं ना कहीं अमेरिका ने ईरान की कमजोर नब्ज़ पर हाथ रख लिया है। और यह


पूरी खबर क्या है? इसे हम समझेंगे। अमेरिका का प्लान है कि ईरान की संपत्तियों, फंड और ज्त की गई संपत्तियों का इसतेमाल उन खाड़ी देशों के रिकंस्ट्रक्शन में किया जाएगा जिन्हें भविष्य में होने वाले ईरानी हमलों से नुकसान पहुंचे। यह जानकारी अमेरिकी वित्त


मंत्री स्कॉट बेसेंट की सोच से परिचित एक सोस ने दी। सोस के मुताबिक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग यह भी विचार कर रहा है कि ईरान की संपत्तियों का इस्तेमाल पहले हुए नुकसान की मरम्मत के लिए भी किया जाए। यह जानकारी शनिवार को रटर्स की रिपोर्ट में सामने आई है। बेसेंट की टीम खाड़ी देशों


में हुए नुकसान का आकलन करेगी और यह अनुमान मांगेगी कि वॉर शुरू होने के बाद से ईरान द्वारा पहुंचाए गए नुकसान की मरम्मत पर कितना खर्च आएगा। अमेरिका का यह प्लान एक ऐसे समय पर आया है जब तेहरान एक बार फिर खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है। हालांकि स्पष्ट कर दिया जाए दोस्तों

निशाना खाड़ी देशों पर नहीं है जैसा कि सीनन दावा कर रहा है। निशाना है खाड़ी देशों के अंदर अमेकी बेसिस पर। वेस्टर्न मीडिया इस तरह से खबरों को तोड़ मरोड़ कर पेश करती है। और अब एक जरूरी संदेश सच के इस सफर में मेरा साथी बनिए। मेरा चैनल जॉइ कीजिए और इनमें से एक विकल्प एक ऑप्शन


चुनिए। शुक्रिया। और जैसे कि आप जानते हैं दोस्तों 28 फरवरी को यह जंग शुरू हुई थी। आगाज हुआ था मिनाब स्कूल में 160 बच्चों की मौत के साथ और साथ ही सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामिनी की मौत के बाद। और अब अमेरिकी राष्ट्रपति क्या कहते हैं कि मैं मुस्तबा खामिनी से


मिलना चाहता हूं। भाई जिसके पूरे परिवार को आपने खत्म कर दिया, बर्बाद कर दिया, आप उससे मिलने की कोशिश कर रहे हैं। पता चलता है कि अमेरिका के अंदर रत्ती भर भी सेंसिटिविटी नहीं है। पूरी तरह से संवेदनहीन इनसेंसिटिव हो चुका है अमेरिका। मगर बुरी खबर ट्रंप के लिए मिडिल ईस्ट से


नहीं आ रही है। ट्रंप के लिए बुरी खबर आ रही है अपने ही देश के अंदर। क्योंकि उनका वॉर हर गुजरते लम्हे के साथ उनके लिए अनपॉपुलर होता जा रहा है। मैं आपको बतलाना चाहता हूं अलजाजीरिया की ये खबर जो मैं आपको बार-बार बता रहा हूं। 100 डेज इनू द वॉर एंड ट्रंप फेल्स टू रैली यूएस सपोर्ट


यानी अमेरिकी जनता उनके साथ नहीं है। रोज रोज ईरानी जनता सड़क पर उतर रही है। अपने पूरे स्क्रीन्स पर देखिए अपनी आर्म्ड फोर्सेस के लिए किस तरह से ईरानी जनता जो है वो अपना समर्थन जतला रही है। ये रोज का नजारा है। ये रोज का नजारा है। मगर जहां तक अमेरिका की बात है, मैं आपका ध्यान


खींचना चाहूंगा अल जजीरा के इस आर्टिकल की तरफ क्योंकि यह आर्टिकल बहुत कुछ कहता है और मिड टर्म इलेक्शंस और आने वाले दिनों में ट्रंप के लिए मुश्किलात पैदा करता है क्योंकि यह मत भूलिए चार रिपब्लिकन सांसदों की मदद से अमेरिका में कानून पारित हो गया और यह कानून यह कहता है कि


बगैर कांग्रेस की अनुमति के आप जंग शुरू नहीं कर सकते। मैं मानता हूं कि ट्रंप के पास इस मुद्दे को लेकर वीटो है। मगर हकीकत यह भी है कि अपने देश के अंदर उनकी मुश्किलात बढ़ती जा रही हैं। क्या ये जमीन तैयार कर रहा है उनके इंपीचमेंट की? इसको लेकर हमें इंतजार करना पड़ेगा। मगर सबसे


पहले बड़ी खबर और यह लेख अपने आप में बहुत कुछ कहता है। इसके एक-एक लफ्ज़ पर गौर कीजिएगा। युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका की राय बता रही है कि ज्यादातर अमेरिकी ईरान पर बमबारी के खिलाफ थे। जब लड़ाई शुरू हुई थी तब भी हालात नहीं बदले। कई अमेकी मतदाताओं का मानना है कि यह युद्ध


बेवजह है और अमेरिका के लिए नुकसानदेह। शिबली टलहामी जो यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड में शांति और विकास के प्रोफेसर हैं और इस युद्ध पर सर्वे कर चुके हैं। उन्होंने कहा एक बात बिल्कुल साफ है कि बहुत कम अमेरिकी मानते हैं कि ईरान के साथ यह युद्ध अमेरिका के हित में है। विशेषज्ञों का


कहना है कि युद्ध को जनता का समर्थन ना मिलना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अमेरिका में ट्रंप की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है। डेमोक्रेटिक पार्टी नवंबर में होने वाले मिड टर्म इलेक्शंस में कांग्रेस पर फिर से नियंत्रण हासिल करने की उम्मीद कर रही है। अगर ऐसा हुआ तो ट्रंप के बाकी


राष्ट्रपति कार्यकाल के एजेंडे को बड़ा झटका लग सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड के एक सर्वे के मुताबिक सिर्फ 16% अमेरिकी मतदाता मानते हैं कि अमेरिका यह युद्ध जीत चुका है या जीत रहा है। इससे पता चलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बार-बार किए जा रहे जीत के दावों पर अमेरिकी ज

पूरी तरह भरोसा नहीं कर रही है। सर्वे में यह भी सामने आया है कि ज्यादातर मतदाता लगभग 33% रिपब्लिकन समर्थक भी शामिल हैं। मानते हैं कि इस युद्ध का अमेरिका के इंटरेस्ट पर फायदा कम नुकसान ज्यादा हुआ है। इसके मुकाबले सिर्फ 12% लोगों ने जिनमें 25% रिपब्लिकन समर्थक भी शामिल


हैं। उन्होंने कहा कि इस युद्ध का असर नुकसान से ज्यादा प्रॉफिटेबल यानी फायदेमंद रहा है। इसका मतलब दोस्तों यह कि अधिकतर अमेरिकी इस जंग के खिलाफ हैं। अधिकतर अमेरिकी मान रहे हैं कि अमेरिका हार चुका है और यह खबर कहीं और से भी दोस्तों अमेरिका से आ रही है। 

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